सेवा में
श्रीमान अध्यक्ष महोदय
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग नई दिल्ली
विषय :- झारखण्ड के कोडरमा जिले के झुमरी तिलैया स्थित गीता क्लिनिक में नवजात बच्चे के चोरी होने के सम्बन्ध में
महोदय
हम आपका ध्यान झारखण्ड के कोडरमा जिले के झुमरी तिलैया स्थित गीता क्लिनिक की ओर आकृष्ट कराना चाहूँगा जहा पर एक महिला ममता देवी पति राजेश साव निवासी यदुट़ाड ने एक बच्चे को जन्म दिया, पर महिला के अनुशार अस्पताल प्रबंधन द्वारा उसे जीवित या मृत कोई बच्चा नहीं दिया गया इसके अलावे महिला ने अस्पताल के डाक्टर पर बिना डिग्री के काम करने का आरोप लगाई है,यह खबर 4 जुलाई 2017 को हिंदुस्तान अख़बार में प्रकाशित की गई। जिसका लिंक http://m.livehindustan.com/jharkhand/kodarma/story-geeta-clinic-accused-of-theft-of-neonatal-1234238.html संलग्न है।
अतः महोदय से नम्र निवेदन है की उक्त मामले को गम्भीरता से लेते हुए न्यायिक जाँच कर तत्काल कार्यवाही की जाए साथ ही जिले में संचालित निजी अस्पतालों के डाक्टरो की डिग्री की जाँच कराइ जाए,और जिले के झोला छाप दक्टारो और गैर निबंधित क्लीनिको के अवैध सञ्चालन पर रोक लगाई जाए। कार्यवाही की एक प्रति हमें भी उपलब्ध कराइ जाए।
भवदीय
ओंकार विश्वकर्मा
मानवाधिकार कार्यकर्त्ता
डोमचांच कोडरमा झारखण्ड
संपर्क 9934520602
खबर विस्तार से
हिन्दुस्तान टीम, कोडरमाUpdated: 4 अगस्त, 2017 7:38 PM
गीता क्लिनिक पर एक महिला ने अपने नवजात की चोरी का आरोप लगाते हुए तिलैया थाना में मामला दर्ज कराया है। दर्ज मामले में महिला ममता देवी (पति-राजेश साव, निवासी यदूटांड) ने कहा कि दो अगस्त को मुझे हल्का पेट दर्द हुआ, जिसके कारण शाम में गीता क्लिनिक तिलैया में भर्ती हुई। डॉ.अरुण ने कहा कि प्रसव कराना पडेगा, क्योंकि सात माह का गर्भ है और प्रसव पीड़ा हो रही है। उसी दिन रात के 9-10 बजे मुझे प्रसव कराया गया और मेरे भाई छोटन साव को कहा गया कि बच्चा ठीक है,आप काउंटर पर पैसा जमा करा दें। मेरे भाई ने काउंटर पर पांच हजार रु.जमा कर दिया। आधे घंटे के बाद डॉ. अबोध ने कहा कि आपका बच्चा मरा हुआ पैदा हुआ, इसलिए उसे फेंक दिया गया। मेरे परिजनों द्वारा काफी मिन्नत करने के बाद भी क्लिनिक द्वारा न तो जीवित और न हीं मृत बच्चा दिया गया। महिला ने डॉक्टर अबोध पर नवजात बच्चे को बेच देने का आरोप लगाया। महिला का आगे कहना है डॉ. अबोध एक जेनरल सर्जन हैं और उनके पास गाइनोकोलॉजिस्ट की डिग्री नहीं है, फिर भी मेरा गैर मर्यादित ढंग से बिना महिला चिकित्सक का प्रसव कराया गया। महिला का कहना है कि मुझे जीवित या मृत बच्चा जो है सो दिलाया जाए। उनका कहना है कि बच्चा मृत भी पैदा हुआ है तो हिंदू रिति-रिवाज से उसका दाह-संस्कार करना मेरा धर्म है। उन्होंने डॉक्टर और क्लिनिक पर उचित कार्रवाई की मांग की है। क्या कहते हैं डॉक्टर? गीता क्लिनिक के डॉ. अरुण कु.अबोध इस आरोप को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह बेबुनियाद आरोप है। उन्होंने कहा कि ममता देवी को काफी ब्लीडिंग हो रहा था और ऐसी स्थिति में वह क्लिनिक आयी। खून की कमी को देखते हुए मैनें उनके परिजनों से ब्लड चढ़ाने की अनुमति के बाद भर्ती किया। इस दौरान बच्चा थैले के साथ बाहर फेंक दिया,जो अनमैच्योर था। बच्चे को मरीज और उनके परिजनों को दिखा दिया गया। उनलोगों ने अस्पताल का 7 हजार 100 रु. का बिल पेमेंट किया। डॉक्टर का कहना है कि 2 अगस्त की शाम सवा 7 बजे उन्हें भर्ती कराया गया और 3 अगस्त को नॉर्मल होने के बाद छोड़ दिया गया। अब वह बाहर जाकर क्यों आरोप लगा रही है, यह समझ से बाहर है। मामले को लेकर पूछने पर एसडीपीओ अनिल शंकर ने कहा कि फिलहाल मामला दर्ज कर अनुसंधान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि महिला चोरी का आरोप लगा रही है,जबकि डॉक्टर का कहना है कि बच्चा अनमैच्योर और लिक्विड फार्म में था, अब यह सारा मामला अनुसंधान के बाद हीं साफ हो पाएगा।
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